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pyar
" प्यार "ये ऐसा शब्द है की सब लोग चाहते चाहते है. सारी दुनिया इसके साथ जुड़ी है लेकिन , आज-कल लोगोने प्यार का तमाशा बनाया है अपनी भावनाओको समाज के साथ जोड़नेका कष्ट कोई नहि करता आखिर क्यू ये नौबत आई है? किसीने लाई हाई? इसे कौन सुधारने वाला हाई या नही? फास्ट लाइफ का कौन जुम्मेदार है? कल क्या होने वाला है? कुछभी नाही समज़ाने वाला............ हर एक आदमी प्यार,पैसा और जिस्म के पीछे भागनेमे ही खुशी समाज़ बैठा है. ---------- आगे और भी है.......
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